बेटी पर सुविचार

बेटी पर सुविचार

बेटी पर सुविचार | {299+} Daughter Quotes in Hindi | बेटियों पर कुछ कविताएँ



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बेटा भाग्य का,
बेटी सौभाग्य की



बेटियां न होती अगर इस संसार में
सुना पड़ा होता हर घर परिवार में।



आसमान में चिड़िया की चहक
और घर में बेटी की महक अनमोल है।



वो चिराग क्या रोशनी करेंगे,
बेटियां उजाला करने के लिए काफी है।



खुदा की पसंद के घर में बेटियां आती है,
सबको ये सुख आसानी से नहीं मिलता।



“वो शाख है न फूल, गर तितलियाँ न हों,
वो घर भी कोई घर है, जहाँ बच्चियाँ न हों।”



एक ही दिन दूर करना पड़ता है,
वरना कौन शरीर से दिल निकालना चाहता है।



गौर से देखने की जरूरत है,
देवी के तमाम रूप की झलक हर घर की
बेटियां में दिख जाएगी।



बेटी है सौ बेटो समान,
नहीं चहिए हमें , झूठा सम्मान।



हर घर की “जान” होती हैं बेटियाँ,
दो कुलों की “मान” होती है बेटियाँ।



बेटी आप के दिल को कभी न,
ख़त्म होने वाले प्यार से भरने के लिए
स्वर्ग से भेजी गयी एक परी हैं।



एक बेटी के बिना जिंदगी कैसी होती है,
दुनिया में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।



एक बेटी इस दुनिया के सबसे
खूबसूरत उपहारों में से एक है।



बाप के खुशियों का संसार होती है,
किसी ने सही ही कहा है,
बेटियां तो बाप का जहान होती है।



एक सभ्य समाज का निर्माण बेटे बेटियां दोनो ही कर सकते है,
पर एक समाज का निर्माण केवल बेटियां ही कर सकती है।



स्वर्ग का मतलब ही है की,
घर में बेटियां होना।



खुशियां भी उसी घर आती है,
जिस घर का दरवाजा बेटियां खोलती है।



एक बेटा केवल खुद को शिक्षित करता है,
पर एक बेटी शिक्षा से पूरे समाज को शिक्षित करती है।



जो परिवार बेटी ना होने की कामना कर रहा होता हैं,
वह परिवार असल में सुख प्राप्ति ना
होने की कामना कर रहा होता हैं ।



बेटियों से बड़ा खजाना
इस संसार में और कोई नही है।



ईश्वर की सबसे सुंदर रचना
बेटियां ही है , बाकी सब उसके बाद।



बेटियों को दुर्भाग्य समझने वाले
असल में अपनी किस्मत को दुतकार रहे होते है।



एक धागे में हर रिश्ते को पिरोए रखती है,
वो बेटी पूरे घर को संजोए रखती है।



उस घर में कभी बरकत नहीं होती,
जहां बेटियों की इज्जत नहीं होती।



बेटियां महान होती है,
हर घर की शान होती है।



पिता की हर ख्वाइश को पूरी करना
हर बेटी का सपना होता है।



हर राष्ट्र की उन्नति ,
बेटियों की उन्नति से जुड़ी होती है।



बेटियों से खाना बनवाने से पहले
उन्हें काबिल बनाए क्या पता फिर
उन्हें खाना बनाने की जरूरत न पड़े।



दो आंगन में खुशियां बिखेरने की जिम्मेदारी होती है,
बेटियों की जिंदगी इतनी आसान थोड़ी होती है।



बेटी जीवन द्वारा दी गई
सबसे अनमोल और सुंदर भेट है।



एक बेटी वो है जो ,
जरूरत पर आपकी दोस्त भी बन जाती है,
और जरूरत आने पर मां भी बन जाया करती है।



मेरे जीवन की सबसे अनमोल कमाई
मेरी बेटी ही है।



चेहरे की मुस्कान है बेटी
माँ बाप के घर की मेहमान है बेटी
उस नए घर को भी बसाएगी ,
जिस घर से अनजान है बेटी।



जिंदगी के बगीचे की सबसे सुंदर फूल बेटी होती है।



उड़कर एक दिन बड़ी दूर चली जाती है,
बाप के शाखाओं की ये चिड़िया ही तो होती है।



बेटियों का सम्मान करना,
बेटो का परम कर्तव्य होता है।



एक नन्ही बेटी ही,
मां बन कर पूरे घर को संभालती है।



बेटी की विदाई का रिवाज बनाने वालो को,
बेटियों पर दया क्यों नही आई।



अपना घर छोड़ कर जाना कोई आम बात नही,
बेटो से कही दो दिन कहीं और रहने को।



परियों को कहानी पर मुझे विश्वास नहीं,
पर मेरी बेटी मेरी राजकुमारी है।



मेरी बेटी की तरक्की कुछ ऐसी होगी,
की दहेज मांगने वाले को भी शर्म आयेगी।



मेरा हर दिन father’s day जैसा है,
क्युकी मेरी बेटी मेरे साथ है।



खुशी, खुशी नहीं लगती,
घर, घर नहीं लगता
घर में बच्चियां न हो तो,
दिल ,दिल नही लगता।



दो घरों को स्वर्ग बनाने की कला
किसी के पास है तो वो बेटियां है।



बेटियों को हत्या करना एक ऐसा पाप है,
जिसकी सजा की कल्पना करना असम्भव है।



जिस दिन बाटियां पैदा होने पर
खुशियों बनाई जाएंगी उस दिन,
हमारा देश सही में तरक्की कर लेगा।



घर के आंगन के गमले में
बेटी नामक फूल होने महज से
सारा घर दमकने लगता है।



आंगन से जिस दिन बेटियां जाती है,
सारा घर विरान सा लगने लगता है।



बेटियों को भी खुद से जीने का हक है,
ये कोई आप की गुलाम थोड़ी है।



जिस बाप पर बेटी का छाया होता है,
वो बाप न कभी अकेला होता है।



मुझसे सब कुछ छीन लो मुझे कोई गम नही,
मेरी बेटी मेरे साथ रहने दो में बहुत गरीब हूं।



कहते है की बेटियां पराई होती है,
पर सच तो ये है कि बेटियां से ज्यादा अपना कोई नही होता।



हर तकलीफ हस कर सह लेती है,
वो बेटियां है बिन कुछ बोले जी लेती है।



घर वालो की मर्जी को चुप चाप मान लेती है,
वो अपने खुशियों का गला दबा देती है।



दहेज के लोबियों को बेटी न दो,
ये हर बाप का गुरुर है सबसे कहदो।



बेसक “बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ”
पर बेटियों को खुश भी तो रखो।



बाप वो माली है जो अपने हाथो से खिलाए
फूल को किसी और को शौप देता है।



बेटी बोज नही होती बल्कि,
वो मां बाप के कंधो का सबसे मजबूत सहारा होती है।



जिस घर में बेटियों का अनादर होता है,
उस घर में केवल दलिद्रता ही आती है।



अक्सर बेटो को जायदाद से प्यार होता है,
और बेटियों को मां बाप से प्यार होता है।



समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए,
बेटियों को आगे बड़ाना सबसे जरूरी है।



बेटियों को भूख मां–बाप के प्यार की होती है,
पैसों का लालच तो बेटे रखते है।



जिम्मेदारियों से कभी न मुंह मोड़ती है,
कभी बेटी तो कभी बहू बन अपना कर्तव्य निभाती है।



बेटियां तो ईश्वर का वो आशीर्वाद है ,
को कई जन्मों की तपस्या के बाद मिलता है।



बेटियों को पबंदिया नही आजादिया दे,
बेटो से कई ज्यादा नाम रोशन करेंगी।



वो दिन भी ज़रूर आएगा इस समाज में
जब बेटो की नौकरी किसकी बेटियों की सिफारिश से लगेगी।



हर बाप का स्वाभिमान होती है बेटी,
हर घर की आन बान और जान होती है बेटी।



बेटियों को पढ़ाओ तो सही ,
दहेज की चिंता फिर तुम्हे नहीं करनी पड़ेगी।



बेटियों के हौसलों की उड़ान देखनी हो तो,
आसमान की और देख लीजिए अंदाजा हो जाएगा।



इतनी पाबंदियों के बाद बेटियों ने यह कर दिया,
कहीं इन्हे आजादियां मिल गई तो ये क्या करेंगी।



अगर आपके घर में बेटी है तो,
आप दुनिया के सबसे अमीर घरों में एक हो।



अभिमान , स्वाभिमान सब धोका है,
बेटियों को पढ़ाओ अभी भी मौका है।



बेटी उस मनी प्लांट की तरह है,
जिसमे प्यार का धन कभी खत्म नहीं होता।



कभी गुलाब से नाजुक ,
कभी काटो सी शक्त,
बेटियां रूप बदलती है हर वक्त।



अपने घर को छोड़ कर ,
किसी और घर को स्वर्ग बनाती है,
न जाने क्यों समाज इनकी कुर्बानियों को समझ नही पाता।



जिस घर हो बिटिया की छाया,
उस घर दुख न टीक पाया।



प्यार भरी मुस्कान उसकी,
सबके मन को भाती है,
एक बिटिया के रहने से घर में,
खुशियां ही खुशियां आती है।



बेटी मेरी प्यारी बेटी
सबको हसती हसाती है,
अपना दुख किसी से न बोले,
केवल खुशियां दिकलती है।



रोशनी हर पल रहती है,
जिस घर बेटी रहती है।



खुद चाहे टूट जाती है बेटियां,
पर परिवारों को जोड़े रखती है बेटियां।



रोक सको तो रोक लो ,
बेटियों ने आंधी लाई है,
अब बदलाव की लहर आयेगी।



एक बेटी पिता के लिए “परी”
तो मां के लिए लाडली
तो घर के लिए” देवी” होती है।



किसी ने क्या खूब कहा है,
वो बेटे है ज़मीन बाटकर रह लेंगे,
मगर बेटियां बाप का दुख बाटकर खुश हो जाएंगी।



पत्नी मिलने के बाद बेटे बदल जायेंगे,
पर बेटियां ससुराल में भी मायका नही बुलेंगी।



बेटियों भी उसी घर को नसीब होती है,
जिस घर की सोच हैसियत से नहीं प्यार से बड़ी होती है।



माँ-बेटी का प्रेम और रिश्ता अटूट होता हैं.



सबसे अच्छी दोस्ती का रिश्ता मां — बेटी का होता है।



मां – बेटी का रिश्ता कुछ ऐसा होता है,
जैसे चित्र और चित्रकार का कला से होता है।



बहु और बेटियों में जहां फर्क नहीं होता,
इस परिवार से ज्यादा कोई सुखी नही होता।



एक बेटी दुनिया की सबसे खूबसूरत उपहार में से एक है।



घर की खुशी के लिए अपने खुशियों की कुर्बानी भी दे देती है,
बेटियों से बड़ा योद्धा मैंने आज तक देखा नही।



एक बेटी की तुलना आजीवन उसकी मां से की जाती है,
ये बेटी के लिए गर्व की बात होती है।



रख हौसला मंजिल खुद आयेगी तेरे पास,
तू औरत है तेरी यहीं सबसे बड़ी ताकत है।



पिता को कन्यादान का सुख सिर्फ बेटी दे सकती है।



पीतल Ki बालियों Me बेटी ब्याह Di,
Baap मज़दूर Tha सोने Ke खान Me.
रास्ते Me खड़ी Har लड़की Ko घूरने Walo,
Bhagwan तुम्हे चाँद Si बेटी De.



हमारे Dil को Koi माँगने ही Na आया,
Kisi गरीब Ki बेटी Ka हाथ हो जैसे.
Yaha इंसानो Ko इंसानो से Dar लगता Hai,
Shahar की गलियों Ko अंधेरो से Dar लगता है !
अब Kaise बाप गुड्डा Lekar देगा ,अपनी Beti को,
अब Uski बेटी को गुड्डो Se भी Dar लगता Hai.



Paiso की Bhukh वालों Ko,
Bhikh दीजिए – Beti नहीं।
Har Ek चीज में Beti की Pasand पूछी जा रही थी ,
सिर्फ Saadi उसकी Pasand के Khilaf की जा रही थी



Shayad उस दिन Tala टूटे संविधान की Peti का,
Jis Din जिस्म निचौड़ा Jayega किसी मंत्री Ya नेता की बेटी Ka,



Beti बचाओ , Beti पढ़ाओ ,
Aur बेटी को Dhakad भी बनाओ।



बढ़ जाती है आंखों की चमक मेरी इनकी मुस्कराहट देखकर,
ये बेटियां ही तो हैं जो जीती हैं दूसरों के दुखों को समेटकर।



तेरे आने से जो आई थी मेरे आंगन में बहार याद आती है,
तेरे नन्हे पैरों में पड़ी वो पायल की झनकार याद आती है।



घर में बेटा हो तो भाग्य उदय होता है,
मगर, बेटियों का जन्म तो सौभाग्य से होता है।



जरूरी नहीं कि चिरागों से ही रोशन हो जहां,
घर में उजाले के लिए एक बेटी ही काफी है।



हर किसी की किस्मत में कहां बेटियां,
खुदा की नेमत हैं ये नसीबों से ही मिलती हैं।



फूलों के आने से पेड़ों की आभा बढ़ जाती है,
बेटियों के होने से ही तो घर में बहार आती है।



बाप पेड़ तो बेटियां कलियों की तरह होती हैं,
खिलने पर दोनों ही एक दूसरे से जुदा होती हैं।



पिता का प्यार तो हर बेटी को मिलता है,
मगर, बेटी का प्यार मुश्किल से नसीब होता है।



बेटे घर के दीपक तो बाती हैं बेटियां,
बिना इनके चिराग रोशन नहीं हुआ करते।



ख्वाहिशें दबाकर दूसरों की खुशियां ढूंढती हैं,
ये तो बेटियां है यह अपने लिए कहां जीती है।



हर घर का सम्मान होती हैं बेटियां,
माता-पिता का अभिमान होती हैं बेटियां।



चाहे जितने भी फूल लगा लो आंगन में,
घर में महक तो बेटी के आने से होगी।



चिड़िया मेरे आंगन की अब कहीं और चहचहाती है,
पिता की यादों से भी कहीं बेटी ओझल हो पाती है।



बेटियां तो घर की मेहमान होती हैं,
इस बात से वो सदा अनजान होती हैं,
छोड़ना पड़ता है एक दिन इन्हें बाबुल का घर,
क्योंकि, ये किसी अनजान की पहचान होती हैं।



कौन कहता है कि नहीं होते सीने में दो दिल,
पूछना है, तो यह ससुराल में बैठी बेटी से पूछो।



जिंदगी में खास होती हैं बेटियां,
कुछ अलग ही इनका एहसास होता है,
दूर होकर भी रहें हरदम दिल के करीब,
इसलिए मां-बाप को इनपर नाज होता है।



चांद की चमक सूरज का तेज,
मेरी बेटी है लाखों में एक।



ख्वाबों के पंख पसारने को तैयार है,
मेरी बेटी बुलंदियों को छूने को तैयार है।



माता लक्ष्मी का रूप होती हैं बेटियां,
इनके कदमों से सुख-समृद्धि चली आती है।



जिंदगी की सबसे बड़ी पहेली होती है बेटी,
हर मां की सबसे अजीज सहेली होती है बेटी।



मुश्किल में भी बेटियां रखती हैं हर बात का ख्याल,
झट से पहचान जाती हैं ये मां-बाप के दिल का हाल।



बेटियां तो इस पूरे संसार का आधार होती हैं,
इन्हें बोझ समझने वालों की किस्मत खोटी होती है।



सारे ग़मों को दामन में छिपा लेती हैं,
ये बेटियां ही हैं, जो घर में खुशियां फैलाती हैं।



उसके घर में कभी लक्ष्मी वास नहीं करती,
जो मां होकर भी बेटी की आस नहीं करती।



हर रिश्तों के मोल वो खूब समझती है,
ये बेटी ही है, जो पूरे परिवार को बांधे रखती है।



घर की जान होती हैं बेटियाँ
पिता का गुमान होती हैं बेटियाँ
ईश्वर का आशीर्वाद होती हैं बेटियाँ
यूँ समझ लो कि बेमिसाल होती हैं बेटियाँ।



बेटो से ज्यादा वफादार होती हैं बेटियाँ
माँ के कामों में मददगार होती हैं बेटियाँ
माँ-बाप के दुःखको समझे, इतनी समझदार होती हैं बेटियाँ
असीम प्यार पाने की हकदार होती हैं बेटियाँ।



बेटियों की आँखे कभी नम ना होने देना
जिन्दगी में उनकी खुशियाँ कम ना होने देना
बेटियों को हमेशा हौसला देना, गम ना होने देना
बेटा-बेटी में फर्क होता हैं, ख़ुद को ये भ्रम ना होने देना।



लडकें की तरह लड़की भी, मुट्ठी बांध के पैदा होती हैं।
लडकें की तरह लड़की भी, माँ की गोद में हसती रोती हैं।।



करते शैतानियाँ दोनों एक जैसी।
करते मनमानियां दोनों एक जैसी।।



दादा की छड़ी दादी का चश्मा तोड़ते हैं।
दुल्हन के जैसे माँ का आँचल ओढ़ते हैं।।



भूक लगे तो रोते हैं, लोरी सुन कर सोते हैं।
आती हैं दोनों की जवानी, बनती हैं दोनों की कहानी।।



दोनों कदम मिलकर चलते हैं।
दोनों दिपक बनकर जलते हैं।।



लड़के की तरह लड़की भी नाम रोशन करती हैं।
कुछ भी नहीं अंतर फिर क्यूँ जन्म से पहले मारी जाती हैं।।



बेटियां बेटियां बेटियां…
बेटियां बेटियां बेटियां…



बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।
निश्छल मन के परी का रूप होती हैं।
कड़कती धुप में शीतल हवाओ की तरह।
वो उदासी के हर दर्द का इलाज़ होती हैं।



घर की रौनक आंगन में चिड़िया की तरह।
अन्धकार में उजले की खिलखिलाहट होती है।
सुबह सुबह सूरज की किरण की तरह।
चंचल सुमन मधुर आभा होती हैं।



कठनायियोंको पार करती हैं असंभव की तरह।
हर प्रश्न का सटीक जवाब होती हैं।
इन्द्रधनुष के साथ रंगों की तरह।
कभी माँ, कभी बहन, कभी बेटी होती हैं।



पिता की उलझन साझा कर नासमज की तरह।
पिता की पगड़ी गर्व सम्मान होती हैं।
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।



Tamam रियासतों Ka ताज Sar पे Nazar आता है,
Gareeb पिता के आँगन Me-
जब Beti नाम का कोई Sazar आता है !



Beta भाग्य Hai गर-
Beti शौभाग्य Hai.
Roshni होती Hai चरागों से Sahi है,
कइयों Ka घर Beti होने से उजाला Ho जाता है।



हर Beti का Baap जरूर Hota है,
Lekin हर बाप Ki बेटी Nahi होती।



Ghar के आंगन की सबसे Khubsurat फूल बेटियां ही होती हैं।
Beti घर की Saan होती है,
जो Khud बोझ होते हैं उन्हें Bojh लगती होंगी।



Meri बेटी Meri सम्मान,
Beti से घर Ka अभिमान।
Baap के Dil की Jaan होती है,
Bina बेटी कहाँ कल्याण Hota है।



बेटी की प्यार को कभी आजमाना नहीं,
वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं,
पिता का तो गुमान होती है बेटी,
जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी।



उसकी आंखें कभी नम न होने देना,
उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना ,
उन्गली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने,
फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने।



बहुत छोटा सा सफ़र होता है बेटी के साथ,
बहुत कम वक्त के लिये वह होती हमारे पास…!!
असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी,
समझो भगवान् का आशीर्वाद है बेटी!



कि क्या लिखु की वो परियो का रूप होती है
या कड़कती सर्दियों में सुहानी धुप होती है।।



वो होती है चिड़िया की चचाहट की तरह
या कोई निश्चिल खिलखलाहट।।



वो होती है उदासी के हर मर्ज की दवा की तरह
या उमस में शीतल हवा की तरह।।



वो आंगन में फैला उजाला है
या गुस्से में लगा ताला है।।



वो पहाड़ की चोटी पर सूरज की किरण है,



वो जिंदगी सही जीने का आचरण है
है वो ताकत जो छोटे से घर को महल कर दे।।



वो काफिया जो किसी गजल को मुकम्बल कर दे
जो अक्षर ना हो तो वर्ण माला अधूरी है।।



वो जो सबसे ज्यादा जरूरी है
ये नही कहूँगा कि वो हर वक्त सास-सास होती है
क्योंकि बेटियां तो सिर्फ अहसास होती है।।



उसकी आँखे ना गुड़ियाँ मांगती ना कोई खिलौना
कब आओगे, बस सवाल छोटा सा सलोना।।



वो मुझसे कुछ नही मांगती
वो तो बस कुछ देर मेरे साथ खेलना चाहती है।।



जिंदगी न जाने क्यों इतनी उलझ जाती है
और हम समझते है बेटियां सब समझ जाती है।।



Beti Kavita in Hindi
बेटी की प्यार को कभी आजमाना नहीं
वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं
पिता का तो गुमान होती है बेटी
जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी।



उसकी आंखें कभी नम न होने देना
उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना
उंगली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने
फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने।



बहुत छोटा सा सफ़र होता है बेटी के साथ
बहुत कम वक्त के लिये वह होती हमारे पास
असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी
समझो भगवान् का आशीर्वाद है बेटी।



लाड़ली बेटी जब से स्कूल जाने हैं लगी,
हर खर्चे के कई ब्योरे माँ को समझाने लगी।



फूल सी कोमले और ओस की नाजुक लड़ी,
रिश्तों की पगडंडियों पर रोज मुस्काने लगी।



एक की शिक्षा ने कई कर दिए रोशन चिराग,
दो-दो कुलों की मर्यादा बखूबी निभाने लगी।



बोझ समझी जाती थी जो कल तलक सबके लिए,
घर की हर बाधा को हुनर से वहीं सुलझाने लगी।



आज तक वंचित रही थी घर में ही हक के लिए,
संस्कारों की धरोहर बेटों को बतलाने लगी।



वो सयानी क्या हुई कि बाबुल के कंधे झुके,
उन्हीं कन्धों पर गर्व का परचम लहराने लगी।



जीवन की हर कितनी भी कठिनाई को, हसते-हसते सह जाना,
सीखा है ना जाने कहाँ से उसने, अपमान के हर घूँट को,
मुस्कुराकर पीते जाना, मुस्कुराकर पीते जाना।।



क्यों न हो फिर तकलीफ भंयकर, सीखा नहीं कभी टूटकर हारना,
जमाने की जंजीरों में जकड़े हुये, सीखा है सिर्फ उसने,
आगे-आगे बढ़ते जाना, आगे-आगे बढ़ते जाना।।



बेटी का हर रुप सुहाना, प्यार भरे हृदय का,
ना कोई ठिकाना, ना कोई ठिकाना।।



मेरी लाडो (Hindi Poem on Beti)
फूलों सी नाज़ुक, चाँद सी उजली मेरी गुड़िया
मेरी तो अपनी एक बस, यही प्यारी सी दुनिया।।



सरगम से लहक उठता मेरा आंगन
चलने से उसके, जब बजती पायलिया।।



जल तरंग सी छिड़ जाती है
जब तुतलाती बोले, मेरी गुड़िया।।



गद -गद दिल मेरा हो जाये
बाबा -बाबा कहकर, लिपटे जब गुड़िया।।



कभी घोड़ा मुझे बनाकर, खुद सवारी करती गुड़िया
बड़ी भली सी लगती है, जब मिट्टी में सनती गुड़िया।।



दफ्तर से जब लौटकर आऊं
दौड़कर पानी लाती गुड़िया।।



कभी जो मैं, उसकी माँ से लड़ जाऊं
खूब डांटती नन्ही सी गुड़िया।।



फिर दोनों में सुलह कराती
प्यारी -प्यारी बातों से गुड़िया।।



मेरी तो वो कमजोरी है, मेरी सांसो की डोरी है
प्यारी नन्ही सी मेरी गुड़िया।।



लडकें की तरह लड़की भी, मुट्ठी बांध के पैदा होती हैं।
लडकें की तरह लड़की भी, माँ की गोद में हसती रोती हैं।।



करते शैतानियाँ दोनों एक जैसी।
करते मनमानियां दोनों एक जैसी।।



दादा की छड़ी दादी का चश्मा तोड़ते हैं।
दुल्हन के जैसे माँ का आँचल ओढ़ते हैं।।



भूक लगे तो रोते हैं, लोरी सुन कर सोते हैं।
आती हैं दोनों की जवानी, बनती हैं दोनों की कहानी।।



दोनों कदम मिलकर चलते हैं।
दोनों दिपक बनकर जलते हैं।।



लड़के की तरह लड़की भी नाम रोशन करती हैं।
कुछ भी नहीं अंतर फिर क्यूँ जन्म से पहले मारी जाती हैं।।



बेटियां बेटियां बेटियां ..
बेटियां बेटियां बेटियां ..



Beti Par Kavita – क्या हूँ मैं, कौन हूँ मैं
क्या हूँ मैं, कौन हूँ मैं, यही सवाल करती हूँ मैं,
लड़की हो, लाचार, मजबूर, बेचारी हो, यही जवाब सुनती हूँ मैं।।
बड़ी हुई, जब समाज की रस्मों को पहचाना,
अपने ही सवाल का जवाब, तब मैंने खुद में ही पाया,
लाचार नही, मजबूर नहीं मैं, एक धधकती चिंगारी हूँ,
छेड़ों मत जल जाओगें, दुर्गा और काली हूँ मैं,
परिवार का सम्मान, माँ-बाप का अभिमान हूँ मैं,
औरत के सब रुपों में सबसे प्यारा रुप हूँ मैं,
जिसकों माँ ने बड़े प्यार से हैं पाला,
उस माँ की बेटी हूँ मैं, उस माँ की बेटी हूँ मैं।।
सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज हूँ मैं,
नये-नये रिश्तों को बनाने वाली रीत हूँ मैं,
रिश्तों को प्यार में बांधने वाली डोर हूँ मैं,
जिसकों को हर मुश्किल में संभाला,
उस पिता की बेटी हूँ मैं, उस पिता की बेटी हूँ मैं।।



घर की जान होती हैं बेटियाँ
घर की जान होती हैं बेटियाँ
पिता का गुमान होती हैं बेटियाँ
ईश्वर का आशीर्वाद होती हैं बेटियाँ
यूँ समझ लो कि बेमिसाल होती हैं बेटियाँ



बेटो से ज्यादा वफादार होती हैं बेटियाँ
माँ के कामों में मददगार होती हैं बेटियाँ
माँ-बाप के दुःखको समझे, इतनी समझदार होती हैं बेटियाँ
असीम प्यार पाने की हकदार होती हैं बेटियाँ



बेटियों की आँखे कभी नम ना होने देना
जिन्दगी में उनकी खुशियाँ कम ना होने देना
बेटियों को हमेशा हौसला देना, गम ना होने देना
बेटा-बेटी में फर्क होता हैं, ख़ुद को ये भ्रम ना होने देना



कि क्या लिखु की वो परियो का रूप होती है
या कड़कती सर्दियों में सुहानी धुप होती है



वो होती है चिड़िया की चचाहट की तरह
या कोई निश्चिल खिलखलाहट



वो होती है उदासी के हर मर्ज की दवा की तरह
या उमस में शीतल हवा की तरह



वो आंगन में फैला उजाला है
या गुस्से में लगा ताला है



वो पहाड़ की चोटी पर सूरज की किरण है,



वो जिंदगी सही जीने का आचरण है
है वो ताकत जो छोटे से घर को महल कर दे



वो काफिया जो किसी गजल को मुकम्बल कर दे
जो अक्षर ना हो तो वर्ण माला अधूरी है



वो जो सबसे ज्यादा जरूरी है
ये नही कहूँगा कि वो हर वक्त सास-सास होती है
क्योंकि बेटियां तो सिर्फ अहसास होती है



उसकी आँखे ना गुड़ियाँ मांगती ना कोई खिलौना
कब आओगे, बस सवाल छोटा सा सलोना



वो मुझसे कुछ नही मांगती
वो तो बस कुछ देर मेरे साथ खेलना चाहती है



जिंदगी न जाने क्यों इतनी उलझ जाती है
और हम समझते है बेटियां सब समझ जाती है



माश्रे का तो ये दस्तूर है
न जाने बेटियों का क्या कसूर है



माँ बाप भी बेटियों की विदाई के लिए मजबूर है
लाड से पाल के दुसरो के हवाले करना बस यही एक जिंदगी का उसूल है



बड़ी चाहतो से तो विदा कर के लाते है दुसरो की बेटियों को अपने घर
कुछ ही अर्शे में वो सब चाहते चकना चूर है



फिर कुछ दिन में किसी की बेटी दिन रात के लिए
आप के लिए फ़क्त एक मजदूर है



मेरी माँ ने तो बड़ी उम्मीद से तुम्हारे हवाले किया था
तुमने भी तो साथ देने का वादा किया था



मेरी आँखों में आंसू ना आने देने का इरादा भी किया था
न जाने फिर अब हर बात पर तुम्हे ये लगता है कि बस मेरा ही कसूर है



बस मेरे ही दिमाग में फितूर है
मेरे मामले में आकर क्यों हर रिश्ता मजबूर है



माश्रे का तो बस यही एक दस्तूर है
क्या बेटी बन के आना ये मेरा कसूर है



कलियों को खिल जाने दो,
मीठी ख़ुशबू फ़ैलाने दो
बंद करो उनकी हत्या,
अब जीवन ज्योत जलाने दो!!



कलियाँ जो तोड़ी तुमने,
तो फूल कहाँ से लाओगे ?
बेटी की हत्या करके तुम,
बहु कहाँ से लाओगे ?



माँ धरती पर आने दो,
उनको भी लहलाने दो
बंद करो उनकी हत्या,
अब जीवन ज्योत जलाने दो!!



माँ दुर्गा की पूजा करके,
भक्त बड़े कहलाते हो
कहाँ गयी वह भक्ति,
जो बेटी को मार गिराते हो.



लक्ष्मी को जीवन पाने दो,
घर आँगन दमकाने दो
बंद करो उनकी हत्या
अब जीवन ज्योत जलाने दो



बेटी पर कविता – कहती बेटी बाँह पसार
कहती बेटी बाँह पसार,
मुझे चाहिए प्यार दुलार।



बेटी की अनदेखी क्यूँ,
करता निष्ठुर संसार?



सोचो जरा हमारे बिन,
बसा सकोगे घर-परिवार?



गर्भ से लेकर यौवन तक,
मुझ पर लटक रही तलवार।



मेरी व्यथा और वेदना का,
अब हो स्थाई उपचार।



दोनों आंखें एक समान,
बेटों जैसे बेटी महान !



करनी है जीवन की रक्षा,
बेटियों की करो सुरक्षा



बेटी ये कोख से बोल रही,
माँ करदे तू मुझपे उपकार.



मत मार मुझे जीवन दे दे,
मुझको भी देखने दे संसार.



बिना मेरे माँ तुम भैया को
राखी किससे बंधवाओंगी.



मरती रही कोख की हर बेटी
तो बहु कहाँ से लाओगे



बेटी ही बहन, बेटी ही दुल्हन
बेटी से ही होता परिवार



मानेगे पापा भी अब माँ
तुम बात बता के देखो तो



दादी नारी तुम भी नारी
सबको समझा के देखो तो



बिन नारी प्रीत अधूरी है
नारी बिन सुना है घर-बार



नही जानती मै इस दुनिया को
मैंने जाना माँ बस तुमको



मुझे पता तुझे है फ़िक्र मेरी
तू मार नही सकती मुझको



फिर क्यों इतनी मजबूर है तू
माँ क्यों है तू इतनी लाचार



गर में ना हुई तो माँ फिर तू
किसे दिल की बात बताएगी



मतलब की इस दुनिया में माँ
तू घुट घुट के रह जाएगी



बेटी ही समझे माँ का दुःख
‘अंकुश’ करलो बेटी से प्यार



मै बेटी हूँ मुझे आने दो, मुझे आने दो
मुझे भी तितली की तरह गगन में उड़ना है.



मेरे आने से पतझड़ भी बसंत बन जाए,
और खाली मकान भी घर बन जाए.



मै वही साहसी बेटी हूँ
जो भेद गयी अंतरिक्ष को भी.



मै जग की जननी हूँ
मै बेटी हूँ मुझे आने दो, मुझे आने दो



मुझे भी अटखेलिया करने दो
मुझे भी गीत मल्हार गाने दो



रोशन कर दूंगी घर को ऐसे
जैसे कोई चाँद सितारा हो



मै वही कर्मवती पद्मिनी, साहसी झाँसी रानी हूँ
जो न झुकेगी, न टूटेगी हर एक गम सह लेगी.



मै तेरी आँखों का तारा बनूँगी,
नाम तेरा रोशन करूंगी इस दुनिया में.



जब भी आएगी कोई बांधा या विपदा
मै तेरे साथ खड़ी होंगी, मै बेटी हूँ मुझे आने दो



मै भी कल-कल करती नदियों की तरह
इस दुनिया रूपी समुंद्र जीना चाहती हूँ



मै आउंगी जरुर आउंगी, फिर कुछ ऐसा कर जाउंगी
कि इस दुनिया को अमर कर जाउंगी.



मै कलियों में फूलो की तरह
तेरे घर को खुशियों से भर दूंगी.



मै वो वर्षा हूँ जो न आई तो
ये खुशियों से भरी धरा बंजर हो जाएगी.



मै सूरज की तरह चमकुगी.
फिर एक नया सवेरा लाऊंगी



मै बेटी हूँ मुझे आने दो, मुझे आने दो



पूजे कई देवता मैंने तब तुमको था पाया |
क्यों कहते हो बेटी को धन है पराया |
यह तो है माँ की ममता की है छाया |
जो नारी के मन आत्मा व शारीर में है समाया ||



मैं पूछती हू उन हत्यारे लोगों से |
क्यों तुम्हारे मन में यह ज़हर है समाया |
बेटी तो है माँ का ही साया |
क्यों अब तक कोई समझ न पाया |



क्या नहीं सुनाई देती तुम्हे उस अजन्मी बेटी की आवाज़ |
जो कराह रही तुम्हारे ही अंदर बार-बार |
मत छीनो उसके जीने का अधिकार |
आने दो उसको भी जग में लेने दो आकार |



भ्रूण हत्या तो ब्रह्महत्या होती है |
उसकी भी कानूनी सजा होती है |
यहाँ नहीं तो वहाँ देना होगा हिसाब |
जुड़ेगा यह भी तुम्हारे पापों के साथ ||



अजन्मी बेटी की सुन पुकार |
माता ने की उसके जीवन की गुहार |
तब मिल बैठ सबने किया विचार |
आने दो बेटी को जीवन में लेकर आकार |



तभी ज्योतिषों ने बतलाया |
बेटी के भाग्य का पिटारा खुलवाया |
यह बेटी करेगी परिवार का रक्षण |
दे दो इस बार बेटी के भ्रूण को आरक्षण |
सावित्री नौटियाल काल ‘सवि’



VIDEO CREDIT :- Shayari with Akash



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